सीधा उत्तर: चंद्र और सौर गणना में तालमेल के लिए अतिरिक्त मास
अधिक मास कई हिंदू चंद्र-सौर पंचांगों में जोड़ा जाने वाला अतिरिक्त चंद्र मास है। सामान्य अमावस्या-आधारित गणना में दो अमावस्याओं के बीच यदि सूर्य की नई निरयन राशि में संक्रांति न हो, तो उस चंद्र मास को अधिक माना जाता है। अतिरिक्त मास का नाम उसके बाद आने वाले सामान्य मास के नाम से जुड़ता है, जैसे नियमित श्रावण से पहले अधिक श्रावण।
- बिना समायोजन के चंद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटा पड़ता है।
- पंचांग लगातार दो अमावस्याओं के बीच सूर्य की संक्रांति जाँचता है।
- उस अवधि में संक्रांति न हो तो इस पद्धति में अतिरिक्त मास माना जाता है।
- विशेष पंचांग की गणना-सेटिंग और स्थानीय पर्व-नियम अलग हो सकते हैं।
अधिक मास को अतिरिक्त या अंतःक्षेपित मास भी कहा जाता है। यह अंग्रेजी कैलेंडर का तेरहवाँ महीना नहीं है और हर तारीख में एक चंद्र-दिन जोड़ने का अर्थ भी नहीं। यह चंद्र-सौर वर्ष में कैलेंडर का समायोजन है, जिसके कारण कुछ वर्षों में एक मास-नाम दो बार आता है।
चंद्र-सौर कैलेंडर को समायोजन की जरूरत क्यों है?
चंद्र मास एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक की कलाओं के चक्र पर चलता है और औसतन लगभग 29.53 दिन का होता है। बारह ऐसे मास करीब 354.37 दिन के बनते हैं। सौर वर्ष लगभग 365.24 दिन का है, इसलिए बिना समायोजन के चंद्र गणना हर वर्ष मौसमों से करीब ग्यारह दिन पीछे रह जाती है। समय के साथ चंद्र मास और उससे जुड़े पर्व ऋतुओं में खिसकने लगेंगे।
चंद्र-सौर पंचांग दोनों चक्र जोड़ता है। तिथि और चंद्र मास सूर्य-चंद्र संबंध पर आधारित होते हैं, जबकि सूर्य की ऋतु-पथ एक और संदर्भ देता है। अधिक मास हर तीन साल बाद किसी तय अंग्रेजी तारीख पर नहीं जोड़ा जाता। पंचांग अमावस्या और सूर्य की राशि-परिवर्तन घटनाओं का संबंध देखकर उसे पहचानता है। इसलिए इसका आवर्तन होता है, लेकिन यह ग्रेगोरियन कैलेंडर का सीधा शेड्यूल नहीं।
यह फरवरी में एक दिन जोड़ने जैसा नहीं। लीप-दिन नागरिक वर्ष में एक दिन बढ़ाता है; अधिक मास किसी चंद्र-सौर वर्ष में पूरा चंद्र मास जोड़ता है। चंद्र मास के नाम रखने की सीमाएँ अमांत और पूर्णिमांत में समझें।
व्यावहारिक नियम: अमावस्याओं के बीच संक्रांति देखें
सामान्य अमांत-आधारित जाँच में लगातार दो अमावस्या-क्षण लिखें। फिर देखें कि उनके बीच सूर्य नई निरयन राशि में प्रवेश करता है या नहीं। राशि-प्रवेश को संक्रांति कहते हैं। यदि उस चंद्र मास में ऐसा प्रवेश न हो, तो इस गणना में मास अधिक माना जाता है। मास का नाम पंचांग की परंपरा जोड़ती है; खगोलीय जाँच संक्रांति के अभाव की है।
सामान्य चंद्र मास में प्रायः एक संक्रांति आती है। दुर्लभ स्थिति में एक ही चंद्र मास में दो संक्रांतियाँ पड़ सकती हैं; इससे क्षय या लुप्त मास की अलग स्थिति जुड़ती है और उसके लिए अलग कैलेंडर नियम चाहिए। हर असामान्य वर्ष पर अधिक मास का नियम सीधे लागू न करें। पंचांग-निर्माता विशेष क्रम को खगोलीय और परंपरागत नियमों से समझते हैं।
यह जाँच दो अमावस्याओं के बीच सौर राशि-प्रवेश से जुड़ी है, अंग्रेजी कैलेंडर में तेरह पूर्णिमाएँ होने से नहीं। अंग्रेजी वर्ष में “ब्लू मून” की परिभाषा अलग मास-सीमा पर आधारित है; उससे अधिक मास पहचानना विश्वसनीय नहीं।
जाँचा हुआ उदाहरण: 2023 का अधिक श्रावण
| चंद्र मास की सीमा | स्थानीय समय (IST) | इस अंतराल में संक्रांति? | पंचांग-पठन |
|---|---|---|---|
| अमावस्या 1 | 18 जुलाई 2023, 00:02 | — | उदाहरण-अंतराल शुरू |
| अमावस्या 2 | 16 अगस्त 2023, 15:08 | नहीं; सिंह संक्रांति 17 अगस्त को हुई | अधिक श्रावण |
| अमावस्या 3 | 15 सितंबर 2023, 07:10 | हाँ; अगली तिथि-अवधि में सिंह संक्रांति हुई | इसके बाद नियमित श्रावण |
लगातार तीन अमावस्या-क्षणों की स्वतंत्र जाँच Swiss Ephemeris और इस परियोजना के JPL DE440s-आधारित गणना-तंत्र से की गई; दोनों में एक सेकंड से कम का अंतर आया। दोनों के अनुसार निरयन सूर्य ने 17 अगस्त को दूसरी अमावस्या के बाद और तीसरी से पहले सिंह राशि में प्रवेश किया। अयनांश और गणना-सेटिंग के अनुसार संक्रांति के सटीक मिनट बदल सकते हैं, पर इस उदाहरण का मास-वर्गीकरण नहीं बदलता।
18 जुलाई से 16 अगस्त के पहले अंतराल में संक्रांति नहीं थी, इसलिए वह अतिरिक्त श्रावण है। अगले अंतराल में सिंह संक्रांति हुई, इसलिए वह नियमित श्रावण है। यह नमूना IST और Lahiri-आधारित निरयन संदर्भ से है; किसी स्थानीय पंचांग में सीमा के मिनट थोड़ा अलग हो सकते हैं। यह पुराने वर्ष का जाँचा हुआ उदाहरण है, आज की तारीख का अनुमान नहीं।
मास-नाम दो बार क्यों दिखाई देता है?
अतिरिक्त चंद्र मास का नाम उसके बाद आने वाले नियमित मास के नाम से रखा जाता है। कई पंचांग दोनों को अलग दिखाने के लिए अधिक और निज जैसे शब्द लगाते हैं; निज का अर्थ सामान्य या नियमित मास है। इसलिए अधिक श्रावण के बाद श्रावण या निज श्रावण आ सकता है। एक नाम का दोहराव कैलेंडर समायोजन का हिस्सा है, छपाई की गलती नहीं।
मास-नाम चंद्र मास को सौर राशियों से जोड़ने की पंचांग-पद्धति पर निर्भर करता है। अमांत और पूर्णिमांत में कृष्ण पक्ष का नाम अलग हो सकता है, भले दोनों एक ही चंद्र-पक्ष बताएं। अधिक मास की दो प्रविष्टियाँ मिलाते समय पहले दोनों पंचांगों की मास-सीमा देखें, फिर तिथि-अंतराल और संक्रांति-नियम जाँचें।
अधिक मास के लिए “पुरुषोत्तम मास” नाम भी कई समुदायों में भक्तिपूर्वक प्रयोग होता है। यह धार्मिक नाम और उससे जुड़ी साधना परंपरा के भीतर अर्थपूर्ण हैं, पर अतिरिक्त मास की खगोलीय पहचान अलग प्रश्न है। इससे यह निष्कर्ष न निकालें कि हर परिवार एक ही व्रत, निषेध या पूजा मानता है।
अधिक मास क्या बताता है और क्या नहीं?
अधिक मास बताता है कि चंद्र-सौर कैलेंडर ने मास-स्तर का समायोजन किया है। अपने आप यह हर पर्व की तारीख, हर व्रत का नियम या हर परिवार का अनुष्ठान-क्रम तय नहीं करता। किसी पूजा के लिए विशेष तिथि, स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय या अन्य समय देखा जा सकता है। उस पूजा के स्थानीय पंचांग और समुदाय का नियम अपनाएँ।
कुछ परंपराओं में इस महीने में विशेष संस्कार करने या टालने की सलाह मिल सकती है। ये धार्मिक निर्देश परंपरा-विशेष हैं, खगोलीय गणना का सार्वभौमिक परिणाम नहीं। विवाह, गृह-प्रवेश या संकल्प हो तो संबंधित परिवार के पुरोहित या मंदिर से पूछें। किसी सामान्य लेख या डर पैदा करने वाले व्यावसायिक दावे को हर घर का नियम न मानें।
भारत से बाहर रहने पर अमावस्या का खगोलीय क्षण पूरी दुनिया में वही होता है, लेकिन स्थानीय घड़ी की तारीख और पंचांग-दिन समय-क्षेत्र से अलग दिख सकते हैं। जहाँ पूजा होगी उस शहर का कैलेंडर चुनें। नागरिक तारीख एक दिन बदलने से अधिक मास बनता या मिटता नहीं।
अधिक मास के नाम की जाँच कैसे करें?
- पुष्टि करें कि पंचांग चंद्र-सौर है और उसकी मास-पद्धति पहचानें।
- अधिक माने गए मास को घेरने वाली दोनों अमावस्याओं के क्षण लिखें।
- पंचांग के बताए निरयन गणना-सेटिंग से उनके बीच सौर राशि-प्रवेश देखें।
- एक ही कैलेंडर में अधिक मास और उसके बाद आने वाले नियमित मास का नाम मिलाएँ।
- पर्व या पूजा के लिए उस तिथि और स्थानीय पालन-नियम को अलग से देखें।
- नतीजा साझा करते समय शहर, समय-क्षेत्र, वर्ष और गणना-पद्धति साथ दें।
इस क्रम से दावा जाँचा जा सकता है। “हर तीन साल में अधिक मास आता है” स्मरण रखने का मोटा तरीका है, पूरी जाँच नहीं। संक्रांति-रहित चंद्र अंतराल बताता है कि यह मास एक साल में क्यों आया; मास-पद्धति बताती है कि पंचांग में उसका नाम कैसे छपा।
सामान्य प्रश्न
नीचे दिए उत्तर कैलेंडर-गणना और इस महीने से जुड़ी धार्मिक परंपरा को अलग रखते हैं।
अधिक मास क्या होता है?
यह कई हिंदू चंद्र-सौर पंचांगों में चंद्र मासों को सौर वर्ष से तालमेल में रखने के लिए जोड़ा जाने वाला अतिरिक्त मास है।
अधिक मास कैसे पहचानते हैं?
सामान्य अमांत गणना में दो अमावस्याओं के बीच संक्रांति न हो तो उस चंद्र मास को अधिक माना जाता है।
क्या अधिक मास ठीक हर तीन साल में आता है?
नहीं। कोई निश्चित अंग्रेजी-वर्ष अंतराल लागू नहीं। पंचांग चंद्र और सौर घटनाएँ देखकर इसे पहचानता है।
अतिरिक्त मास के बाद वही मास-नाम क्यों आता है?
अतिरिक्त मास को उसके बाद आने वाले नियमित मास का नाम मिलता है; नियमित मास को निज भी कहा जा सकता है।
क्या अधिक मास ब्लू मून जैसा है?
नहीं। ब्लू मून अंग्रेजी कैलेंडर में पूर्णिमाओं की अलग परिभाषा है; अधिक मास अमावस्या और संक्रांति पर आधारित चंद्र-सौर समायोजन है।
क्या अधिक मास में सभी संस्कार वर्जित हैं?
नियम परंपरा और समुदाय के अनुसार अलग होते हैं। किसी खास संस्कार के लिए संबंधित मंदिर या पुरोहित से पूछें।