पंचांग और सनातन शब्दकोश
तिथि, नक्षत्र, योग, करण और धार्मिक परंपराओं में आने वाले महत्वपूर्ण शब्दों का सरल परिचय।
तिथि
सूर्य और चंद्रमा के दीर्घांश के अंतर पर आधारित चंद्र दिवस। एक पक्ष में पंद्रह तिथियाँ होती हैं।
विस्तार से देखें →नक्षत्र
चंद्रमा की स्थिति को समझने के लिए आकाश-पथ का सत्ताईस भागों में किया गया पारंपरिक विभाजन।
विस्तार से देखें →योग
सूर्य और चंद्रमा के दीर्घांशों के योग से बनने वाला पंचांग का एक अंग। कुल सत्ताईस योग माने जाते हैं।
विस्तार से देखें →करण
तिथि का आधा भाग। पंचांग में किसी कार्य के समय का विचार करते हुए करण भी देखा जाता है।
विस्तार से देखें →राहुकाल
दिन के आठ भागों में से एक ऐसा काल जिसे नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए सामान्यतः टाला जाता है।
विस्तार से देखें →मुहूर्त
किसी कार्य के आरंभ के लिए पंचांग और परंपरा के आधार पर चुना गया उपयुक्त समय।
विस्तार से देखें →एकादशी
शुक्ल या कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, जो विष्णु उपासना और व्रत से विशेष रूप से जुड़ी है।
विस्तार से देखें →पूर्णिमा
शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि, जब चंद्रमा पूर्ण प्रकाशमान दिखाई देता है।
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