पंचांग कैसे पढ़ें: तिथि से करण तक सरल परिचय

वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण—पंचांग के पाँच अंगों को दैनिक जीवन के उदाहरणों के साथ समझें।

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पंचांग का अर्थ है समय के पाँच अंगों का समुच्चय। ये पाँच अंग हैं—वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण। किसी दिन का धार्मिक समय समझने के लिए केवल अंग्रेज़ी तारीख देखना पर्याप्त नहीं होता; स्थानीय सूर्योदय और चंद्रमा-सूर्य की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है।

वार

वार रविवार से शनिवार तक सात दिनों का क्रम है। पारंपरिक पंचांग में दिन का संबंध स्थानीय सूर्योदय से जोड़ा जाता है, इसलिए स्थान बदलने पर समय-संदर्भ भी बदल सकता है।

तिथि

तिथि सूर्य और चंद्रमा के बीच बढ़ते कोण पर आधारित चांद्र दिन है। एक तिथि सूर्योदय के बीच भी बदल सकती है; इसलिए व्रत, पूजा या पारण के लिए तिथि का आरंभ और अंत दोनों देखना चाहिए। शुक्ल पक्ष अमावस्या के बाद पूर्णिमा की ओर बढ़ता है और कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद अमावस्या की ओर।

नक्षत्र

चंद्रमा जिस नक्षत्र-खंड में स्थित होता है, वही उस समय का नक्षत्र कहलाता है। कुल सत्ताईस नक्षत्र माने जाते हैं और चंद्रमा सामान्यतः लगभग एक दिन में एक नक्षत्र से आगे बढ़ता है।

योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त दीर्घांश-गति से बनता है। करण आधी तिथि के बराबर काल-खंड है। किसी शुभ कार्य के लिए तिथि के साथ नक्षत्र, योग, करण और निषिद्ध कालों को भी देखा जाता है।

दैनिक उपयोग का सरल क्रम

  1. पहले अपना सही शहर और तारीख चुनें।
  2. स्थानीय सूर्योदय और उस समय की तिथि देखें।
  3. तिथि तथा नक्षत्र का अगला परिवर्तन समय पढ़ें।
  4. राहुकाल, चौघड़िया और होरा को अलग-अलग संदर्भों में देखें।
  5. व्रत या पर्व के लिए उसकी विशेष निर्णय-पद्धति और पारण समय अवश्य देखें।

स्रोत और संदर्भ

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